पौड़ी गढ़वाल | 12 दिसंबर 2025
कोटद्वार स्थित नींबूचौड़ की ‘दिया दिव्यांग संस्था’ से जुड़े दिव्यांगजन अब आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन पर और जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के प्रयासों से संस्था को दोना–पत्तल निर्माण के लिए मशीनें और आवश्यक कच्चा माल प्रदान किया गया है। इस पहल से दिव्यांगजनों के लिए स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आजीविका के अवसर सृजित हुए हैं।
निरीक्षण के बाद शुरू हुई पहल
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कुछ समय पूर्व दिया दिव्यांग संस्था का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों से उनकी रोजगार की रुचियों के बारे में जानकारी ली।
दिव्यांगजनों ने दोना–पत्तल निर्माण के लिए मशीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान में लेते हुए पूरा कराया।
मशीन उपलब्ध होने के बाद संस्था को दिव्यांगजनों को दोना–पत्तल निर्माण का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद दिव्यांगजन निर्माण कार्य में सक्रिय रूप से जुट गए हैं।

20 से अधिक दिव्यांगजन जुड़े स्वरोज़गार की राह पर
संस्था की संचालिका कविता मलासी ने बताया कि मशीनें और कच्चा माल मिलने के बाद 20 से अधिक दिव्यांगजन तेजी से प्रशिक्षण प्राप्त कर उत्पादन कार्य में शामिल हो गए हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
दिव्यांगजनों ने कहा कि इस सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक जीवनयापन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम
जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित सिंह दुबड़िया ने बताया कि यह योजना जिलाधिकारी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को कौशल आधारित रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में शामिल करना है।
जिलाधिकारी बोलीं—”लक्ष्य है हर दिव्यांग को आत्मनिर्भर बनाना”
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि जिले के दिव्यांगजन किसी पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने कौशल के आधार पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
उन्होंने बताया कि दिया दिव्यांग संस्था को प्रदान की गई सहायता इसी उद्देश्य की दिशा में एक प्रभावी पहल है।
जिलाधिकारी ने आशा व्यक्त की कि इस तरह के प्रयासों से अन्य दिव्यांगजन भी प्रेरित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।



